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श्री वृषभानुसुता की आरती | Shree Vrishbhanusuta Ki Aarti

आरती श्री वृषभानुसुता की, मंजु मूर्ति मोहन ममता की॥त्रिविध तापयुत संसृति नाशिनि,विमल विवेक विराग विकासिनि।पावन प्रभु पद प्रीति प्रकाशिनि, सुन्दरतम

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भगवद्‍ गीता आरती | Bhagvad Gita Aarti

भगवद्‍ गीता आरती | Bhagvad Gita Aarti जय भगवद् गीते, जय भगवद् गीते ।हरि-हिय-कमल-विहारिणि सुन्दर सुपुनीते ॥ कर्म-सुमर्म-प्रकाशिनि कामासक्तिहरा ।तत्त्वज्ञान-विकाशिनि

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